
चारधाम यात्रा 2026 की आधिकारिक शुरुआत हो चुकी है और उत्तराखंड में भक्ति का माहौल और भी गहन होता जा रहा है। देवभूमि के चारों पवित्र धामों में से एक केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026, बुधवार को सुबह आठ बजे से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। इससे पहले 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट भी खुल चुके हैं, जिसके बाद राज्यभर में चारधाम यात्रा का आध्यात्मिक उत्साह और भी बढ़ गया है। इस वर्ष लाखों भक्त बाबा केदार के दर्शन के लिए उत्तराखंड की इस ऊंची वादी की यात्रा पर निकलेंगे।
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सामान्य दर्शन पर नहीं, विशेष पूजा पर शुल्क
केदारनाथ धाम में सामान्य दर्शन के लिए श्रद्धालुओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाता, यानी कोई भी व्यक्ति बिना पैसे दिए मंदिर में भगवान शिव के मंदिर में घुसकर दर्शन कर सकता है। हालांकि, अगर कोई श्रद्धालु महाभिषेक, रुद्राभिषेक, लघु रुद्राभिषेक, षोडशोपचार पूजा, शाम की आरती या विशेष पाठ में स्वयं या अपनों के नाम पर भाग लेना चाहता है, तो इसके लिए पहले से ऑनलाइन बुकिंग करनी होगी और निर्धारित शुल्क भी जमा करना होगा।
इस बार बद्रीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने विभिन्न पूजा और आरती के लिए दरों में थोड़ी बढ़ोतरी की है, जिसके चलते श्रद्धालुओं को थोड़ा ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है।
महाभिषेक, रुद्राभिषेक और अन्य पूजाओं का शुल्क
वर्ष 2026 के लिए केदारनाथ धाम में घर बैठे ऑनलाइन बुक की जा सकने वाली कुछ मुख्य पूजाओं और उनके शुल्क का अनुमानित दायरा इस प्रकार है:
- महाभिषेक पूजा: 11,500 रुपये, जिसमें अधिकतम 5 व्यक्तियों का शामिल होना मान्य है, जबकि उसके बाद प्रति अतिरिक्त व्यक्ति के लिए अलग शुल्क लगता है।
- रुद्राभिषेक पूजा: 7,500 रुपये, अधिकतम 5 व्यक्तियों के लिए वैध, उसके बाद अतिरिक्त लोगों के लिए अलग चार्ज।
- लघु रुद्राभिषेक पूजा: 7,100 रुपये, जिसके लिए भी 5 व्यक्ति की सीमा रखी गई है।
- षोडशोपचार पूजा: 7,500 रुपये, परिवार या समूह के लिए लोकप्रिय विकल्प।
- अष्टोपचार पूजा और पंचोपचार पूजा: दोनों का शुल्क करीब 1,100 रुपये है, जिसमें भी अधिकतम 5 व्यक्तियों की सीमा है।
- पूरे दिन की पूजा: 51,000 रुपये, जो सामान्यतः बड़े परिवार या संस्थागत उद्देश्यों के लिए बुक की जाती है।
शाम की आरती और विभिन्न पाठों के लिए भी अलग‑अलग दरें तय की गई हैं। उदाहरण के लिए शिव अष्टोत्तरी पाठ में करीब 1,500 रुपये का शुल्क लगता है, जिसमें अधिकतम 3 व्यक्तियों की सीमा और लगभग 5 मिनट का समय दिया जाता है। इसी तरह शिव सहस्रनाम पाठ, शिव नामावली, शिव महिम्न स्तोत्र, शिव तांडव स्तोत्र और शिव पार्वती स्तोत्र जैसे पाठों का शुल्क सामान्यतः 2,500 या 2,100 रुपये के बीच रखा गया है, जिनके लिए 3 व्यक्तियों की सीमा और अलग‑अलग समय‑स्लॉट (5–15 मिनट) निर्धारित हैं। वहीं पूरी शाम की आरती के लिए शुल्क लगभग 3,100 रुपये तय किया गया है, जो 1 घंटे की सम्पूर्ण आरति से संबंधित है।
घर बैठे ऑनलाइन बुकिंग की प्रक्रिया
अगर आप विशेष पूजा या आरती में शामिल होना चाहते हैं, तो आपको यात्रा से पहले ही आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन बुकिंग करनी होगी। इसके लिए सबसे पहले बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की आधिकारिक वेबसाइट https://badrinath-kedarnath.gov.in पर जाना होगा। वहां पर सबसे पहले रजिस्ट्रेशन करने होगा; इसके लिए आपको अपना मोबाइल नंबर, नाम, लिंग और ईमेल आईडी दर्ज करना होगा और OTP के जरिए वेरिफिकेशन पूरा करना होगा।
रजिस्ट्रेशन और लॉग‑इन के बाद वेबसाइट पर “Online Puja Booking” या संबंधित लिंक पर क्लिक करें। यहां से आप अपनी पसंद का धाम यानी श्री केदारनाथ धाम चुनेंगे, फिर ड्रॉपडाउन में महाभिषेक, रुद्राभिषेक, लघु रुद्राभिषेक, षोडशोपचार पूजा, शाम की आरती या विशेष पाठ जैसी सेवा का चयन करना होगा। इसके बाद आपको अपने या अपने परिवार के सदस्यों की संख्या और नाम दर्ज करने होंगे, जिसके अनुसार शुल्क तय होगा। अंत में ऑनलाइन भुगतान करने के बाद आपको एक कन्फर्मेशन स्लिप या रसीद मिलेगी, जिसे आप यात्रा के दिन मंदिर में दिखाकर अपनी बुकिंग वैध करवा सकेंगे।
यात्रा से पहले रखें ये बातें ध्यान में
चारधाम यात्रा के दौरान उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मौसम और भीड़ काफी असर डालते हैं, इसलिए यात्रा की तारीख, मौसम और ट्रेकिंग की कठिनाई को ध्यान में रखकर ही योजना बनानी चाहिए। विशेष पूजा या आरती की बुकिंग जल्दी कर लेने से न सिर्फ शुल्क और शुभ मुहूर्त की गारंटी बनती है, बल्कि यात्रा के दौरान अनावश्यक दवाव और उलझन भी कम होती है।
यात्रा से पहले अपने साथ वैध पहचान पत्र, चारधाम यात्रा रजिस्ट्रेशन स्लिप, हेल्थ इमरजेंसी के लिए जरूरी दवाइयां और ऊंचाई से जुड़े रिस्क को ध्यान में रखते हुए भीष्म पितामह, श्रद्धा और सुरक्षा दोनों को संतुलित करते हुए बाबा केदार के दर्शन की यात्रा अंजाम देना ही अभी भक्तों के लिए सबसे बड़ी आस्था का निशान बन गया है।














